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Vedvati and Ravan Story in Hindi | वेदवती और रावण की कथा

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भारतीय धर्मग्रंथों में अनेक ऐसी दिव्य स्त्रियों का वर्णन मिलता है, जिन्होंने अपने त्याग, तप और संकल्प से इतिहास की दिशा बदल दी। ऐसी ही एक महान तपस्विनी थीं वेदवती। उनकी कथा केवल एक स्त्री के अपमान की कहानी नहीं है, बल्कि यह धर्म, आत्मसम्मान, भक्ति और न्याय की अद्भुत गाथा है। वाल्मीकि रामायण के उत्तर काण्ड में वर्णित वेदवती की कथा हमें बताती है कि किस प्रकार एक तपस्विनी के अपमान ने रावण के विनाश की नींव रखी। यही वेदवती आगे चलकर माता सीता के रूप में जन्म लेकर रावण के अंत का कारण बनीं। कौन थीं वेदवती? ब्रह्मर्षि कुशध्वज की पुत्री वाल्मीकि रामायण के अनुसार वेदवती, ब्रह्मर्षि कुशध्वज की पुत्री थीं। कुशध्वज कोई साधारण ऋषि नहीं थे, बल्कि वे देवगुरु बृहस्पति के पुत्र माने जाते हैं। कहा जाता है कि जब वेदवती का जन्म हुआ, तब उनके मुख से वेदों की ध्वनि निकल रही थी। इसी कारण उनका नाम ‘वेदवती’ रखा गया। लक्ष्मी का अंश वेदवती को देवी लक्ष्मी का अंश माना गया है। उनका रूप अत्यंत तेजस्वी, पवित्र और दिव्य था। बचपन से ही उनका मन संसार के भोगों से दूर और भगवान विष्णु की भक्ति में लगा रहता था। भगवान विष्णु क...