King Vikramaditya and Navratnas: सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों की अद्भुत कहानी
भारत के स्वर्णिम इतिहास की अद्भुत गाथा भारतीय इतिहास और लोककथाओं में सम्राट विक्रमादित्य का नाम एक ऐसे महान राजा के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने केवल तलवार के बल पर ही नहीं, बल्कि ज्ञान, न्याय और संस्कृति के माध्यम से भी भारत को नई पहचान दी। वे एक न्यायप्रिय, पराक्रमी और विद्वानों का सम्मान करने वाले सम्राट थे। उनके शासनकाल को भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है। आज भी जब न्याय, बुद्धिमत्ता और आदर्श शासन की बात होती है, तो विक्रमादित्य का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। उनके नाम से चलने वाला विक्रम संवत भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण आधार है। कौन थे सम्राट विक्रमादित्य? ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सम्राट विक्रमादित्य उज्जयिनी (आज का उज्जैन) के महान चक्रवर्ती सम्राट थे। “विक्रमादित्य” शब्द का अर्थ होता है — पराक्रम का सूर्य। कहा जाता है कि उन्होंने भारत भूमि को शकों और अन्य विदेशी आक्रमणकारियों से मुक्त कराया। इसी महान विजय की स्मृति में उन्होंने 57 ईसा पूर्व (57 BCE) में विक्रम संवत की शुरुआत की, जो आज भी हिंदू पंचांग का आधार माना जाता है। लेकिन विक्रमादित्य केवल...